शुक्रवार, 22 मई 2009

मनमोहन सिंह : अर्थशास्त्री से लेकर परिपक्व राजनेता


मनमोहन सिंह का राजनीतिक सफर : मनमोहन सिंह क्रम के मुताबिक देश के 18वें प्रधानमंत्री है जबकि व्यक्तिगत रुप से देश के 14वें प्रधानमंत्री है। मनमोहन सिंह दूसरी टर्म के लिए प्रधानमंत्री पद पर बैठनेवाले पांचवे प्रधानमंत्री है। मनमोहन सिंह से पहले जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी ने यह सिध्धि हासिल की है। राजीव गांधी इंदिरा गांधी की हत्या के बाद बहुत कम समय के लिए प्रधानमंत्री पद पर बैठे थे और बाद में तुरंत ही लोकसभा चुनाव आ गए थे जिसमें वे भारी बहुमती से फिर से सत्ता में आए थे। प्रधानमंत्री पद के पांच साल पूरे करने के बाद सतत दूसरी टर्म के लिए प्रधानमंत्री पद पर बैठने वाले मनमोहन सिंह जवाहर लाल नेहरु के बाद दूसरे प्रधानमंत्री है। इंदिरा गांधी १९६७ में प्रधानमंत्री पद पर बैठी थी लेकिन १९७२ में उनकी टर्म पूरी हो उससे पहले ही उन्होंने लोकसभा का विसर्जन करवा कर चुनाव घोषित करवा दिया था और उसमें वे भारी बहुमती के साथ चुनकर आई थी लेकिन उनकी पहले की टर्म पांच साल की नहीं थी। मनमोहन सिंह पहले ऐसे प्रधानमंत्री है जिन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लडा और बाद में प्रधानमंत्री बने हो। इससे पहले इंदिरा गांधी और इन्दरकुमार गुजराल दोनों लोकसभा में बिना चुने ही प्रधानमंत्री पद पर बैठे थे लेकिन मनमोहन सिंह की तरह लोकसभा चुनाव लडे बिना ही प्रधानमंत्री पद पर नहीं बैठे थे। मनमोहन सिंह पांच साल की टर्म पूरी करने वाले जवाहर लाल नेहरु, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, नरसिंहराव और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद छठे प्रधानमंत्री है।
आज मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी होगी उसके साथ ही देश में एक नए युग की शुरुआत होगी और सभी की नजरें इसके बाद मनमोहनसिंह क्या करेंगे इस पर टिकी हुई है।
कांग्रेस को मिली जीत के लिए राहुल गांधी और सोनिया गांधी का जीतना योगदान है उतना ही योगदान मनमोहन सिंह का भी है। भाजपा ने आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और उसके सामने कांग्रेस ने मनमोहन सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। जनता ने मनमोहन सिंह को पसंद किया क्योंकि मनमोहन सिंह आडवाणी से ज्यादा ईमानदार है, ज्यादा कार्यदक्ष नेता है।
जनता ने मनमोहन सिंह को पसंद किया इसके पीछे एक कारण उनकी अर्थशास्त्र के बारे में समझ है और इस देश में दस में से नौ लोग यह मानते है कि अभी वैश्विक मंदी के माहौल में मनमोहन सिंह ही इस देश को सही मार्गदर्शन दे सकते है। इस देश को विकास की बुलंदियों पर ले जा सकते है। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने उससे पहले ही उन्होंने अपना एजन्डा सेट कर दिया है और आर्थिक बाबत में नौकरियां बढाने से लेकर आर्थिक विकास दर बढाने तक की घोषणाएं की है लेकिन सिर्फ घोषणाएं करने से कुछ नहीं होता, इसके लिए काम करना पडता है। अब देखना यह है कि मनमोहन सिंह इस मामले क्या करते है। मनमोहन सिंह क्या करते है यह तो वक्त आने पर पता चलेगा ही लेकिन कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में दिए वादों को पूरा करने की कवायद शुरु की है और उनकी यह पहल अच्छी शुरुआत है।
कांग्रेस ने यह जिम्मेदारी सीधे मंत्रियों पर डाली है और हरेक मंत्रालय के पास से आगामी १०० दिन में वे क्या करेंगे इसका रिपोर्ट पहले से मांग लिया है। यह पहल दो तरह से महत्वपूर्ण है। एक तो हमारे यहां राजनीतिक पार्टियां उनके चुनावी घोषणापत्र में जो वादे करती है वह सिर्फ घोषणा तक ही सीमित होता है और वे लोग ऐसा मानते है कि उसका अमल नहीं करना होता।
अभी तक ऐसा ही चलता रहा है और कोई भी पार्टी चुनावी घोषणापत्र का पालन करने में मानती नहीं और लोग उसका हिसाब मांगते नहीं। मनमोहन सिंह जो कुछ भी कर रहे है वह सब चुनावी घोषणापत्र और किए वादों की विश्वसनीयता साबित करने की कवायद है और यह जरुरी भी है। दूसरा फायदा सरकारी तंत्र में संचालन है। इस देश में सरकारी कामकाज बैलगाडी की तरह चलता है तब इन कोशिशों से थोडा बहुत फर्क तो पडेगा ही। मनमोहन सिंह के लिए यह समय उनकी परीक्षा का समय है। मनमोहन सिंह से इस देश की जनता को बहुत सारी अपेक्षाएं है लेकिन फिलहाल पूरे देश की ओर से उन्हें मुबारकबाद।
जय हिंद
प्रधानमंत्री का पता :- ७, रेसकोर्स रोड, नई दिल्ली
E-mail:manmohan@sansad.nic.in

1 टिप्पणी:

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

काग्रेस की जीत के पीछे मनमोहन सिंह भी एक बड़ा फैक्टर रहे हैं.